अभी देखो, दुःख बहुत -2 बढ़ रहा है। और आगे चलकर के और भी बढ़ता रहेगा। इसलिए मास्टर सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ। स्वयं भी अनुभव करो और दूसरों को भी अनुभव कराओ। जैसे सूर्य एक ही समय में कितनी प्राप्तियाँ कराता है। सिर्फ एक प्राप्ति नहीं कराता। सिर्फ रोशनी नहीं देता है। पाॅवर भी देता है। हरेक प्रकार की प्राप्तियाँ कराता है। ऐसे ही आप सभी छः मास में ज्ञान सूर्य बनकर के सुख की, खुशी की, शान्ति की और सहयोग की किरणें फैलाओ। दूसरों को अनुभूति कराओ। उन आत्माओं को अनुभूति हो कि इनसे हमको सुख की प्राप्ति हो रही है। इनके सुख के वायब्रेशन, शांति के वायब्रेशन हमारे तक आ रहे हैं। इन आत्माओं से, इन महान आत्माओं से हमें सहयोग मिल रहा है। ऐसे अनुभव करें। अनुभूति कराओ आपके सूरत को देखते ही उनके अंदर दुःख की लहर कम हो जाए। दु:ख की लहरें कम होते -2 कम से कम मुस्कान तो निकल पडे़। मुस्कुरावें। आपकी दृष्टि लेने से ही उनमें हिम्मत आ जाए। तो ऐसा ज्ञान सूर्य, मास्टर ज्ञानसूर्य बनने का अभी पुरूषार्थ करना है। ये अटेन्शन देना है। विधाता बनना है, तपस्वी बनना है। ऐसी तपस्या करो जो तपस्या की ज्वाला कोई ना कोई अनुभूति जरूर कराए। सिर्फ वाणी ही नहीं सुने उनको अनुभूतियाँ भी कराओ। अनुभूति एक बार हो जाती है तो वो अमर हो जाती है।
Vcd- 205
वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 273
स्टूडेन्ट - बाबा, स्थूल रक्तदान करना चाहिए या नहीं?
बाबा - संकल्पों का रक्तदान करना चाहिए या स्थूल रक्तदान करना चाहिए? कौनसा श्रेष्ठ है? (संकल्पों का) जो ब्राह्मण ज्ञान में रमण करते हैं वो श्रेष्ठ संकल्पों का दान करेंगे उससे ज्यादा फायदा है और जो स्थूल खूनदान करते हैं तो उससे उनकी ताकत कम होती जाती है। संस्कार बिगड़ते जावेंगे। क्योंकि अभी जो भोजन मिल रहा है जिससे रक्त बनता है वो भोजन कैसा मिल रहा है? केमिकल खाद से मिला हुआ। केमिकल से बना खून, वो खून तो फिर हमारा माथा खराब कर देगा।
मैं बहुत रस्ता बताता हूँ और मोस्ट इजी, क्या करो? अभी ये जो देह जो धारण की है ना इस दुनिया में आकर, क्या करो अब? देह को भूल जाओ। अपन को आत्मा समझो और इतना ही नहीं आत्मा समझ करके आत्मा के बाप को पहचानो। कैसे पहचानेंगे? पहचान दिए कि आत्मा ज्योतिबिन्दु है, भृकुटि के मध्य में है। तो आत्मा के बाप को पहचान लेंगे? नहीं। कैसे पहचानेंगे? मुकर्रर रथ को पहचानेंगे; क्योंकि बाप आते हैं तो जिस तन में भी प्रवेश करते हैं- उसका नाम ब्रह्मा रखते हैं; क्योंकि बाप है ना! बाप को क्या चाहिए? बाप को बाप ही चाहिए सृष्टि रचने के लिए? माँ चाहिए। तो जिसमें भी प्रवेश करते हैं, नाम रखते हैं ब्रह्मा तो पहले-2 जिसमें प्रवेश करते हैं। तो एक में प्रवेश करते हैं या दो में करते हैं? एक में? अच्छा! जिस एक में प्रवेश करेंगे वो कैसे जानेगा? जानेगा? तो वो भी नहीं जानेगा, मैं तो बिन्दी हूँ। ज़रूर दो चाहिए ना!
Vcd- 2899
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