वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 300
स्टूडेन्ट- बाबा, किसी के सेवा लेने के संस्कार पक्के हैं ,वो क्या बनेगा?
बाबा - वो दास-दासी बनेगा। जो यहाँ सेवा लेगा उसको वहाँ सेवा देनी पडे़गी। जो यहाँ ईश्वरीय सेवा करेगा निःस्वार्थ अपने रथ के लिए नहीं परमार्थ के लिए। वो वहाँ राजा बनेगा। स्वार्थ युक्त सेवा का कोई फल नहीं होता, कोई रिजल्ट नहीं निकल सकता।
समय-34.33
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