Thursday, September 10, 2020

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वार्तालाप प्वाइंट           वार्ता न .246

स्टूडेन्ट- सतयुग में पुष्पक विमान होता है, बोलते हैं। माना क्या है ? किस तरह होंगे पुष्पक विमान ?

बाबा - यहाँ तो एरोप्लेन विमान आदि जो भी हैं, वो सब कारखानों में बनाए जाते हैं। बनाने वाले मनुष्य होते हैं और वहाँ मनुष्य होते ही नहीं हैं। मन चलाते ही नहीं हैं। वहाँ मन उनका मर्ज रहता है। देवताएँ जो हैं, वो कोई प्रकार की मन-बुद्धि नहीं चलाते। उनको सब कुछ बना-बनाया मुहैया मिलता है और कौन बना करके देता है? देवताओं को खेती करनी पड़ती है क्या? कोई खेती नहीं करनी पड़ती। कारखानों में कपड़े आदि बनाने पड़ते हैं क्या? कोई कपड़े आदि नहीं बनाने पड़ते। प्रकृति उनको सब कुछ महैया करती है। ऐसे-ऐसे पेड़ होते हैं, जिनमें कपड़ा अपने आप निकलता है। फाइन बढ़िया कपड़ा। तो ऐसे-ऐसे पक्षी नहीं हो सकते जो विमान का काम करें? वो पक्षी नजर के इशारे पर उड़ते हैं। कोई कलकारखाने में नहीं बनाए जाते। प्राकृतिक तौर पर बनते हैं। जैसे देवताओं का जन्म होता है, वैसे वहाँ सुखदाई पक्षियों का भी जन्म होता है। अंतर सिर्फ इतना है कि - यहाँ के पशु-पक्षी दुःख देने वाले भी होते हैं और वहाँ के पशु-पक्षी दुःख देने वाले नहीं होंगे। सुख देने वाले होंगे।
हम हैं ही कर्मायोगी। चाहे मुख से कर्म करते हैं आवाज करने का, चाहे कोई भी कर्मेन्द्रियों से कर्म करते हैं हम कर्म करते बाप की याद की प्रैक्टिस करते हैं। कर्मातीत अवस्था का गायन है ना। कैसी अवस्था ? कर्मातीत, माने कर्मों से अतीत की स्टेज। कर्म करते रहें लेकिन कर्मों का लेप-छेप हमारी आत्मा पर ना लगे ऐसी याद तीखी हो। उसको कहते हैं कर्मातीत स्टेज। कर्मातीत अवस्था, अगर हुई तो समझो परीक्षा पूरी हो गई। कर्मातीत अवस्था हो जावेगी तो फिर कोई भी बीमारी आदि नहीं लगेगी। बीमारी आदि कब तक लग रही है ? जब तक कर्मों से अतीत की स्टेज को हमने प्राप्त नहीं किया है। कर्मातीत अवस्था जब बन जावेगी तो लड़ाई शुरू हो जावेगी। और ये ज्ञान बंद हो जावेगा। क्या ? तुम बच्चों की कर्मातीत अवस्था हुई उसकी पहचान क्या होगी ? लड़ाई शुरू और ये ज्ञान का लेन-देन करना बंद हो जावेगा। अभी तुम नई दुनिया के लिए पढ़ते हो।
Vcd- 281
वार्तालाप प्वाइंट            वार्ता न. 417 

स्टूडेन्ट:  - बाबा, जैसे मुरलियों में बोला है कि - भगवान जब आते हैं तो वो किसी से पार्शलिटी नहीं करते हैं। तो हम जो इधर वाले बच्चे हैं, हमारे साथ तो पार्शलिटी हो जाती है कि तीन-तीन, चार-चार महीने बाद बाबा हमको मिलते हैं। 

बाबा - आप अपने पूर्वजन्मों को देखें। बनी बनाई बन रही अब कछु बननी नाहि। पूर्वजन्मों का जैसा हिसाब-किताब है वैसा ही होगा। भगवान को क्या पड़ी है। वो ऊपर से कुछ लेकर के आता है क्या? उसको क्या पड़ी है पार्शलिटी करने की। हिसाब बना हुआ है। अरे! आप पहले नहीं आएगें तो कोई तो पहले आएगा। आप बाद में आए हैं। आप बाद में नहीं आएगें तो कोई तो बाद में आएगा। वो भी यही प्रश्न करेगा। अच्छा! सन् 76 में जो पहले-पहले एडवान्स में आ गए। उनकी उल्टी खोपड़ी हो गई। अभी तक विरोधी बने हुए हैं। तो आगे आने से फायदा या बाद में आने से फायदा? जबकि भगवान के महावाक्य हैं - बाद में आने वाले भी लास्ट सो फास्ट जा सकते हैं। तो आप फायदे में है या नुकसान में है?( स्टूडेन्ट: - फायदे में।) फिर मेहनत कम करनी पड़ेगी। टाईम कम लगेगा और चले जाएगें आगे।
समय: 30.53
जो बताया कि परमब्रह्म की स्टेज में जरूर पहुँचना है।  परमब्रह्म माने इस शरीर को भी क्या बनाना है? शरीर जो देह है- इस देह को भी, इसके रोम-रोम को भी, क्या? सात्विक। सात्विक माने प्रकाशमान बनाना है। रोम-रोम में ज्ञान भर जाए। ज्ञान को प्रकाश कहा जाता है ना, तो ऐसा सतोप्रधान बनाओ।
Vcd- 2880
एडवांस में आने के बाद हमारी बुद्धि चलने लग पड़ती है। एक-2 वाक्य की गहराई में जाती है तो मंथन होता है। शास्त्रों में सागर मंथन की कथा भी आई है कि सागर मंथन हुआ तो उसमें से रत्न निकलें। अमृतकलश भी निकला। तो अमृतकलश जो निकल रहा है वो अब निकल रहा है। हम अमृत रस का पान कर रहे हैं। गीता ज्ञान की उपलब्धि अब हमको हो रही है। तो वो हमारा टीचर भी है, सद्गुरू भी है और बाप भी है। सत्य बाबा है, सत्य टीचर है, सत्य गुरू है। क्या ? उससे जास्ती सच्ची व्याख्या देने वाला टीचर कोई दुनिया में हो नहीं सकता। उससे जास्ती बुद्धि की, वाचा की और तन की सद्गति करने वाला कोई दुनिया में हो नहीं सकता। वो डाक्टर होते हैं; वो तो थोडे़ समय के लिए प्लास्टिक सर्जरी कर देते हैं। एक जन्म भी नहीं टिकती। दो -चार साल टिकती हैं फिर उसके बाद प्लास्टिक सर्जरी कराओ। ये बाप तो ऐसा आकर के इसी जन्म में प्लास्टिक सर्जरी नहीं करता है। ओरिजनल सर्जरी करता है। पाँच तत्वों को ही परिवर्तन कराए देता है। याद की स्टेज में पाँच तत्व भी परिवर्तन हो जाते हैं। तुम्हारे शरीर रूपी नैया और आत्मा का दोनों का खिवैया बाप आया हुआ है। आत्मा को भी पार ले जाता है विषय वैतरणी नदी से क्रॅास कराए देता है। और शरीर रूपी नैया भी विषय वैतरणी नदी से पार चली जाती है।
Vcd- 268
स्टूडेन्ट - पवित्रता क्या है? और असली पवित्रता क्या है?

बाबा  - पवित्र अर्थात् शक्ति क्षीण न हो और अपवित्रता अर्थात् शक्ति क्षीण हो जाए। शक्ति क्षीण हुई, जैसे पतित हुए, शक्तिपात हुआ। अब वो शक्ति चाहे दृष्टि की हो, चाहे कर्मेन्द्रियों की हो, चाहे वाचा की हो, चाहे धन की हो और चाहे तन की हो। शक्ति क्षीण होती है, तो कमज़ोरी आती है ना। कोई के पास बहुत धन है और धन क्षीण हो गया, नष्ट हो गया, तो हॅरसमेंट आवेगा या नहीं आवेगा? हॅरस पैदा हो जाता है। तो कोई भी प्रकार की शक्ति क्षीण तब होती है, जब व्यभिचार दोष आता है। व्यभिचार भ्रष्ट बनाने वाला है। इसलिए दिखाया है कि - सतयुग में राधा की दृष्टि कृष्ण में डूबेगी और कृष्ण की दृष्टि राधा में डूबेगी। कोई प्रकार का व्यभिचार नहीं होगा। जितना-जितना व्यभिचार ब एक को याद करेंगे, तो मैं तुमको पावन ज़रूर बनाऊँगा। एक के याद से ऊँचे उठेंगे। अनेकों की याद से नीचे गिरेंगे। अनेकों की याद भी कब आती है? आँखों से देखते हैं तो याद आती है, इन्द्रियों से संग करते हैं, तो याद आती है। न संग करेंगे और न याद आवेगी।

स्टूडेन्ट - छोटा बच्चा जो होता है वो सोने के टाईम पे हसता क्यों है और रोता क्यों है?

बाबा - हां,वो अपने पुर्व जन्म के स्मृति में रहता है। सूक्ष्म शरीर में रहता है।सूक्ष्म शरीर से दुनिया में विचरण करता है। इसलिए वो कभी हसता है और कभी रोता है। बाहर के वातावरण-जो आँखों से देखता है उससे हँसना रोना नहीं होता। उसकी अपने अंदर की दुनियां है वो सुक्ष्म शरीर के आधार पर हँसना और रोना करता है।
समय: 28.20
सिर्फ बाप को याद करना है और नई दुनिया को याद करना है। तो तुम स्वर्ग में चले जावेंगे। अभी स्वर्ग नहीं रचा गया है। क्या ? स्वर्ग की सौगात नहीं दी है। स्वर्ग की सौगात तो तीरी पर बहिश्त करके दिखाते हैं, देखो ये स्वर्ग है। हथेली पर स्वर्ग दिखाते हैं अभी बना नहीं है स्वर्ग। नई दुनिया की सौगात दी है। दुनिया में तो सब धर्म की आत्माएँ होती हैं। भले हर धर्म की चुनी हुई श्रेष्ठ-ते-श्रेष्ठ अच्छी-2 आत्माएँ हो। लेकिन वहाँ तो सब धर्मों की आत्माएँ होती हैं। तो  अगर तुम अच्छी रीति पढे़ंगे तो स्वर्ग में चले जावेंगे। और बहुतों को पढ़ावेंगे तब जावेंगे। क्या ? क्या कहा ? अगर अच्छी रीति पढे़ंगे और बहुतों को पढ़ावेंगे तो राजा-रानी बन सकते हैं। अगर खुद अच्छी रीति नहीं पढे़ंगे बहुतों को नहीं पढ़ावेंगे तो स्वर्ग में तो जावेंगे लेकिन राजा-रानी नहीं बनेंगे। जितनी रूहानी सर्विस करेंगे उतना ऊँच पद पावेंगे। तुम हो रूहानी सोशल वर्कर। क्या ? रूहानी सोसाईटी की तुम सेवा करने वाले हो। जिस्मानी सोसाईटी की सेवा करने वाले नहीं हो। बाकी सारी दुनिया में है सोशल वर्कर। तुम आत्माओं को बाप रूह का ज्ञान देते हैं। आत्माओं की सेवा करते हैं। इसको कहा ही जाता है आत्माओं की सेवा।
Vcd- 278
वार्तालाप प्वाइंट           वार्ता न. 261

स्टूडेन्ट - बाबा एक मुरली में बोला है कि - जो नारायण के बच्चे होंगे वो नारायण को मिलेंगे और जो नारद के बच्चे होंगे वो नारद को मिलेंगे। इसका अर्थ ?
 
बाबा - नारायण माना जिनका ‘नार‘ अर्थात् ज्ञान ही घर है। उनकी आत्मा ज्ञान के मनन-चिंतन-मंथन में ही रहेगी, साकारी दुनियाँ में बार-बार बुद्धि आना-जाना नहीं करेगी और जो नारद के बच्चे होंगे, ‘नार‘ माना ज्ञान जल ‘द‘ माना देनेवाला अर्थात् जो सिर्फ दूसरों को ज्ञान जल देता है लेकिन खुद साकारी दुनियाँ में भी भ्रमण करता रहता है। नारद को दिखाते है की तीनों लोक में भ्रमण करते थे। दूसरों को कहते थे स्वर्ग चलो, स्वर्ग चलो, वैकुण्ठ चलो और खुद कहाँ दिखाते हैं अपन को? दुःखधाम की दुनियाँ में। ऐसे ज्ञान जल दूसरों को बांटने वाले और खुद न धारण करने वाले, जिनको बंदर का चेहरा दिखाया जाता है, वो नम्बरवार कम कला के नारायण बनते हैं, जिनको नारद कहा गया है। जो सतयुग के सात नारायण हैं, वो नारद हैं नम्बरवार। 
जितना ज्ञान का दर्पण पावरफुल होगा तो शीशे के समान सबको दिखाई देगा। जेैसे बोला है, बडे़ ते बड़ा आरसी है बाप, फिर है मिनी मधुबन, मधुबन। मधुबन हैं शीशे के महल। इन मधुबनों में कोई भी आत्मा अपने को छुपाय नहीं सकती है। जैसे शीशमहल में सबका चेहरा क्लीयर दिखाई देता है, ऐसे ये पाण्डवों का किला ऐसा बन जावेगा, अभी भी बन रहा है कि सबको अपना चेहरा भी दिखाई पडे़गा और दूसरों का भी चेहरा दिखाई पड़ेगा। अभी चेहरे तैयार हो रहे हैं। कोई के राक्षसी  चेहरे तैयार हो रहे हैं और कोई के दैवी चेहरे तैयार हो रहे हैं। ये शास्त्रों में और अजन्ता, एलोरा की गुफाओं में चित्रण किए जाते हैं। माया से तुम बाद में छूटते हैं। माया के साथ बहुत बारी यद्ध चलती है। बहुत लिखते हैं बाबा माया बड़ा तूफान में लाती है ।
Vcd- 1112
स्टूडेन्टः- बाबा , 21 जन्मों के आधार पर 63 जन्म मिलते हैं। अभी सतयुग में पहला नारायण , दूसरा नारायण या तो अलग-2 धर्म की आत्माएँ हैं , उनका पद तो ऊँच है। तो उनको किस हिसाब से अगले 63 जन्म मिलेंगे? 

बाबा:- क्योंकि उन्होंने कलाओं को अभी अपनी आत्मा में बांधा है। अपने अंदर कलायें भर ली है , गुणों को भर लिया है। किसी ने 16 कला सम्पूर्ण तक भरा है और किसी ने पौने 16 15 कला भरा है। किसी ने पौने 14 भरा है। तो जिसने-2 जितना गुण और कलाओं को अपनी आत्मा में समाया है वो ताकत द्वापर, कलियुग में भी काम आती है और यहां शूटिंग होती है। जितना-2 श्रीमत पर चलते हैं ,श्रीमत पर चलने के अभ्यासी बनते हैं , उतना-2 सुख इकट्ठा करते हैं। सुख लेने के अभ्यासी बनते हैं , राजाई पाने के अभ्यासी बनते हैं और जितना श्रीमत के वरखिलाफ चलते हैं उतना नीच पद पाने के अभ्यासी बनते हैं।
समय: 26.15
वर्तमान समय बापदादा दो बातों पर बार-2 अटेन्शन दिलाए रहे हैं। कौन -2 सी दो बातें ? एक संकल्पों पर फुल स्टाॅप। संकल्प-विकल्प चलते रहते हैं ना। अच्छे चलते हैं, बुरे चलते हैं आलतू -फालतू चलते हैं लेकिन प्रैक्टिस ऐसी हो कि जब चाहे तब संकल्प को स्टाॅप कर सकें। बिन्दी लगाओ। प्वाॅइण्ट बन जाओ। और दूसरा स्टाॅक जमा करो। शक्तियों का स्टाॅक जमा करो, गुणों का स्टाॅक जमा करो, ज्ञानरत्नों का स्टाॅक जमा करो। तो ये स्टाॅक जमा करना और बिन्दी लगाना। माना संकल्पों को स्टाॅप करना ये दोनों बातें जरूरी हैं। और  तीन खजाने विशेष जमा करो। एक अपने पुरूषार्थ की प्रालब्ध  अर्थात प्रत्यक्ष फल, जो भी हम पुरूषार्थ करें, वो पुरूषार्थ करने के साथ ही साथ उसका प्रत्यक्ष फल दिखाई दें। तो वो जमा करो। और दूसरा सदा सन्तुष्ट रहना है। खुद भी सन्तुष्ट रहना और दूसरों को भी सन्तुष्ट करना।  सिर्फ सन्तुष्ट रहना नहीं, जो भी संसर्ग-सम्पर्क- संबंध में आते हैं उनको भी संतोष का अनुभव हो। उसके फलस्वरूप दूसरों को जब सन्तोष देंगे तो दूसरों से उसके फलस्वरूप हमको क्या मिलेगा ? दुआए मिलेंगी।

Vcd- 205

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