वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 301
स्टूडेन्ट- बाबा, स्मृतिलब्धा माना क्या?
बाबा - जब तक स्मृतिलब्धा नहीं हुआ है तब तक जैसे चलाओगे वैसे नहीं चलूँगा। अपनी मनमानी चाल चलूँगा और जब स्मृति प्राप्त हो गई कि इसी के द्वारा मेरा कल्याण होना है, दुनिया में और कोई नहीं है जो मेरा कल्याण करे, तो "करिष्ये वचनम् तवः"। जो आप कहेंगे सो ही करुँगा। मुझे स्मृति आ गई, इस दुनियाँ में मेरा कोई कल्याणकारी नहीं हैं। शिव के सिवाय सब अकल्याणकारी है, ये स्मृति मुझे आ गई। स्मृतिलब्धा प्राप्त हो गई।
समय-35.06
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