Tuesday, September 29, 2020

वार्तालाप प्वाइंट       वार्ता न. 302

स्टूडेन्ट- बाबा, कहते हैं सुबह-सुबह जो स्वप्न देखते हैं वो सच होता है।
 
बाबा - स्वप्न की वेला भी होती है। सात्विक अमृतवेले में जो स्वप्न देखा जाता है वो सच भी होता है; लेकिन अपनी अवस्था की भी बात है। बहुत अच्छा पुरूषार्थ करता है, अच्छे पुरूषार्थी को अमृतवेला स्वप्न आता है तो सच्चा भी हो सकता है। उसकी निशानी है कि उठने के बाद आँख खुलेगी तो बहुत खुशी रहेगी; परन्तु इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। स्वप्न और साक्षात्कार ये भक्तिमार्ग की निशानी है। ऐसे नहीं स्वप्न अच्छा हो गया, साक्षात्कार अच्छा हो गया तो बस हमारी प्राप्ति हो गई। नहीं । अच्छा पुरूषार्थ करेंगे तो अच्छे ते अच्छी प्राप्ति करेंगे। यज्ञ के आदि में बहुतों ने अच्छे-2 साक्षात्कार किए। साक्षात्कार करने वालों ने क्या स्वर्ग का अनुमान भी लगा पाया? अनुमान भी नहीं लगा पाया।
ऊँच-ते-ऊँच कुरी कहेंगे सूर्यवंशी हम ब्राह्मण हैं। तो सूर्यवंशियों में सबसे ऊँचा कौन हुआ ? कहेंगे ज्ञान सूर्य प्रगटा अज्ञान अंधेर विनाश। जो सारी दुनिया से अज्ञान अंधकार को दूर कर देता हैं। तुम सारे विश्व की रूहानी सेवा करते हो , सारी दुनिया में रूहानियत का उजेला फैल जाता है। सब रूह रूपी आत्माएँ, रूह रूपी दीपक कहो, रूह रूपी सितारे कहो , तो जगमगा जाते हैं। तो विश्व को  तुम हैविन बना देते हो।  उसको कहा जाता है स्वर्ग। जो भी ऐसी स्टेज में जाने वाले है स्वस्थिति  में वो कहे जाते हैं स्वर्गवासी। अर्थात स्वस्थिति में रहने वाले हुए। तुम जानते हो हम ऊँच ते ऊँच बाप से वर्सा लेने वाले हैं। तो खुशी होनी चाहिए। अक्सर करके खुशी होती है। परन्तु वो तो है विनाशी धन। एक जन्म के लिए धन मिला  वो भी उस जन्म में काम आया ना आया । चोर चुरा  ले गए, अग्नि ने जला दिया, सरकार उठा ले गई। वो तो विनाशी धन है। बाप आकर जो धन देते हैं वो है अविनाशी धन। अविनाशी कैसे ? इस एक जन्म में वो ज्ञान रत्न हमको ऊँच  ते ऊँच तो बनाते ही हैं लेकिन जो ज्ञानधन है वो अनेक जन्मों  के लिए ऐसा हमारी आत्मा में समा जाता है कि अनेक जन्मों के लिए हम ऊँच ते ऊँच साहूकार बन जाते हैं।
Vcd- 750

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