वर्तमान समय बापदादा दो बातों पर बार-2 अटेन्शन दिलाए रहे हैं। कौन -2 सी दो बातें ? एक संकल्पों पर फुल स्टाॅप। संकल्प-विकल्प चलते रहते हैं ना। अच्छे चलते हैं, बुरे चलते हैं आलतू -फालतू चलते हैं लेकिन प्रैक्टिस ऐसी हो कि जब चाहे तब संकल्प को स्टाॅप कर सकें। बिन्दी लगाओ। प्वाॅइण्ट बन जाओ। और दूसरा स्टाॅक जमा करो। शक्तियों का स्टाॅक जमा करो, गुणों का स्टाॅक जमा करो, ज्ञानरत्नों का स्टाॅक जमा करो। तो ये स्टाॅक जमा करना और बिन्दी लगाना। माना संकल्पों को स्टाॅप करना ये दोनों बातें जरूरी हैं। और तीन खजाने विशेष जमा करो। एक अपने पुरूषार्थ की प्रालब्ध अर्थात प्रत्यक्ष फल, जो भी हम पुरूषार्थ करें, वो पुरूषार्थ करने के साथ ही साथ उसका प्रत्यक्ष फल दिखाई दें। तो वो जमा करो। और दूसरा सदा सन्तुष्ट रहना है। खुद भी सन्तुष्ट रहना और दूसरों को भी सन्तुष्ट करना। सिर्फ सन्तुष्ट रहना नहीं, जो भी संसर्ग-सम्पर्क- संबंध में आते हैं उनको भी संतोष का अनुभव हो। उसके फलस्वरूप दूसरों को जब सन्तोष देंगे तो दूसरों से उसके फलस्वरूप हमको क्या मिलेगा ? दुआए मिलेंगी।
Vcd- 205
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