Friday, September 18, 2020

 वार्तालाप प्वाइंट          वार्ता न. 421 

 स्टूडेन्ट  - बाबाजी, अगर विनाश होगा तो हमलोग कहाँ जाएँगे? 

बाबा - विनाश होगा तो बाबाजी कहाँ रहेंगे? बताओ। विनाश होगा तो बाबाजी रहेंगे कि नहीं रहेंगे? 

 स्टूडेन्ट  - रहेंगे। 

बाबा - और बाबाजी की बाईंयाँ, बाईजी रहेंगी या नहीं रहेंगी? रहेंगी कि नहीं रहेंगी? जब बाबा आया हुआ है। जिसको बाबा कह रहे हैं। बाबा तो कहते हैं उन ब्रह्माकुमारियों के बारे में भी पूछो मत कि क्या हाल है। अरे! भगवान के बने तो अच्छा ही हाल होगा या पूछने की ज़रूरत है क्या हाल है? भगवान के बच्चों का कैसा हाल होगा? खुशहाल ही होगा। हाँ, भगवान के बच्चे न बने हो कोई और को ही पति बनाए लिया हो। कोई और को बाप बनाए लिया हो तो बदहाली भी हो सकती है। तो विनाश में उनका तन, मन, धन का विनाश हो सकता है। बाकी बाप के बच्चों को तो परवाह करने की दरकार ही नहीं है। ये तो दूसरे धर्म वाले जो हैं वो भी मानते हैं। दूसरे धर्म के लोग क्या कहते हैं? मुसलमान कहते हैं जब विनाश होगा, कयामत होगी तो अल्लाह ताला के बंदे बडे़ आराम में रहेंगे। जो उसके बंदे नहीं होंगे, जो उसको बंदगी करने वाले नहीं होंगे औरों-औरों को बंदगी करना शुुरू कर दिया होगा। वो बेआरामी में रहेंगे। उनका हार्टफेल भी हो सकता है; लेकिन बाप के बच्चे तो बहुत आराम में रहेंगे। अभी भले कितना भी दु: ख होता हो।
समय: 22 .06

जो विपरीत बुद्धि हो जाते हैं, उनका सारा ज्ञान क्या होता है फिर? उड़ जाता है। ज्ञान उड़ जाता है कि रह जाता है? ज्ञान उड़ जाता है। तो कौन-कौन विपरीत बुद्धि बनते हैं? 500-700 करोड़ में से दो आत्माओं को छोड़ दो, वो विपरीत बुद्धि नहीं बनते हैं और बाकी माया सबको लपेट में आगे पीछे ले लेती है कि छोड़ देती है? हाँ, ज़रूर ले लेती है। विपरीत बुद्धि तो इसका अर्थ भी तुम बच्चे लिख सकते हो कि विपरीत बुद्धि विनश्यन्ति और प्रीत बुद्धि विजयन्ति। अन्त में क्या होगा? जो प्रीत बुद्धि हैं, वो विजय पाएँगे और विपरीत बुद्धि ख़लास हो जाएँगे। उनका अर्थ क्या हुआ? ख़लास हो जाएँगे माना शरीर तो ख़लास नहीं हो जाएगा कि बाप आ करके जो बेहद की पढ़ाई का, जो हद की पढ़ाई होती है, वो हद का पद देती है कि बेहद का? हद का पद एक जन्म के लिए कि अनेक जन्म के लिए? अरे, इतनी देर लगती है। हद की पढ़ाई कितने जन्म के लिए पद देती है? सुनते नहीं, एक जन्म के लिए और ये बेहद का बाप तो बेहद की पढ़ाई तो कितने जन्म के लिए देती है? इतने जन्म के लिए? अच्छा! कितने जन्म के लिए? लिखो, बेहद की पढ़ाई जो है, वो कितने जन्म का पद देती है? लेना चाहे तो कोई भी ले सकता है। 21 जन्म?
Vcd- 2955
वार्तालाप प्वाइंट       वार्ता न. 279

स्टूडेन्ट:- बाबा, मुरली में बोला है जिनकी अकाले मृत्यु होती है तो वो सूक्ष्म शरीर धारण करते हैं ताकि वो और पाप ना कर सके। फिर जो शहीद होते हैं वो भी अकाले मृत्यु पाते हैं 

बाबा:- अभी बताया ना, भाव देखा जाता है, लक्ष्य देखा जाता है। जैसा लक्ष्य वैसे ही लक्षण बनेंगे। इसलिए अपने देश की रक्षा के लिए सेना में भरती होने वाले ढेर-के-ढेर जवान मर जाते हैं। क्या उनको सूक्ष्म शरीर मिलेगा? भूत, प्रेत बनना पडे़ेगा? नहीं। 

स्टूडेन्ट-उनको शरीर मिल जाता है बाबा?

बाबा:- उनको तुरन्त शरीर तैयार रहता है। वो वीर गति प्राप्त करते हैं। उनकी क्षूद्रगति नहीं होती है। फिर दुबारा जन्म लेकर के लड़ाई लड़ते हैं। फिर वीरता के काम करते हैं। भूत, प्रेत बनने वाले होते हैं अकाले मौत शरीर छोड़ते हैं वो अंत मते सो गते। फिर दुबारा अगर जन्म लेंगे भी सूक्ष्म शरीर त्याग करके तो फिर पाप करने लग पडे़ेंगे। इसलिए तीन प्रकार की आत्माएँ गीता में गायी हुई है। एक है भूत, प्रेतों की पूजा करने वाले - भूत, प्रेत योनियों को प्राप्त होते हैं। दूसरे हैं देवताओं की पूजा करने वाले-देवताओं को श्रेष्ठ मानने वाले वे देव योनियों को प्राप्त होते हैं और तीसरे हैं मेरी उपासना करने वाले - वो मेरे को प्राप्त होते हैं।
समय 25.45
हिन्दी व्याख्या

बाप की याद खुशी में लाती है। योग से कर्मातीत अवस्था होती है। कर्मातीत अवस्था हुई माना सब कार्य सम्पन्न स्वतः ही होने लगते हैं। याद खुशी में भी लाती है। बहुत सहज में सहज ये है , क्या ? क्या बात सहज में सहज है ? (स्टूडेन्ट- याद।) और अभी तो बोला याद में रहें बहुत मुश्किल है ? दोनों बातें कैसे होंगी ? कर्मातीत अवस्था हो जावें तो बहुत सहज है।  जो पापकर्म हैं पूर्वजन्मों के वो सारे ही भस्म हो जाए तो तो याद में रहना बहुत सहज है।  और अगर कर्मातीत अवस्था नहीं हुई, पूर्वजन्मों के किए हुए कर्मों का पापों का बोझ जो है वो आत्मा के ऊपर पड़ा हुआ है,तो याद में रहना है बहुत मुश्किल है। कर्मातीत अवस्था हो जावें और लड़ाई शुरू हो जावें। कमाई में कोई भी शारीरिक तकलीफ नहीं है। अच्छा ! मनुष्य से देवता बन जाना ये भी ज्ञान और योग का जादू है। क्या ? ज्ञान की खसूसियत है, योग की खसूसियत है कि मनुष्य को देवता बनाए देती है। हरेक बात अर्थ सहित है। ये है बाप से गुप्त बादशाही लेना।
Vcd- 208
वार्तालाप प्वाइंट        वार्ता न. 279

स्टूडेन्ट:- बाबा, आत्मिक स्थिति और साक्षी का भाव एक ही है क्या?

 बाबा:-‘‘साक्षी दृष्टा निर्गुणो केवलस्य‘‘ ऐसे कहते हैं। पुराना-2 जो लिखा हुआ शास्त्र है, शास्त्र भी पहले सतोप्रधान थे। तो जो साक्षी होगा उसका किसी से लगाव नहीं होगा। बुद्धि का बैलेन्स होगा, कांटा एकाग्र होगा। जो जज की कुर्सी पर बैठता है उसके लिए साक्षी होना बहुत जरूरी है। अगर कोई एक पार्टी की तरफ बुद्धि का झुकाव हो जाये तो फैसला सही नहीं होगा। इसलिए साक्षी होना माना बुद्धि का काँटा एकाग्र होना और बुद्धि का काँटा एकाग्र हो गया। जैसे कांटा होता है ना, उसमें नीचे एक खास बिन्दु होता है, काँटा अगर हिला तो बिन्दु से हट गया। एकाग्र है तो बिन्दु के ऊपर है। तो ये भी बुद्धिरूपी काँटा है। बुद्धि पर लगा है, बिन्दी पर लगा हुआ है तो एकाग्र है। बिन्दु रूपी स्टेज अर्थात् साक्षी दृष्टा। देहधारियों के प्रति लगाव है तो साक्षी दृष्टा हो नहीं सकता। आत्मिक स्थिति पक्की कही नहीं जा सकती ।
समय 6.37

बाप भी तुमको गुप्त दान दे रहे हैं। क्या ? बाप जो तुमको ज्ञान रत्नों का दान दे रहे हैं वो पता चलता है  कि किसको  दे रहे हैं किसको नहीं दे रहे हैं?  किसको प्रत्यक्ष दे रहे हैं किसको गुप्त दे  रहे हैं ? प्रत्यक्ष तो किसको देते नहीं ? गुप्त ही दे रहे हैं। इसलिए कोई उठाता है कोई नहीं उठाता है। उठाने वाले जो हैं वो भी पुरूषार्थी हैं। जैसा -2 उनका पुरूषार्थ वैसा उनका उठाना होता है। दुनिया को पता नहीं है।

Vcd- 208

वार्तालाप प्वाइंट           वार्ता न. 286

स्टूडेन्ट- बाबा एक माता पूछ रही है कि-जो माताएँ ज्ञान में चलती हैं, उनके युगल नहीं चलते हैं। वो क्या कारण है?
 
बाबा - पूर्व जन्म, 63 जन्म तो हुए हैं भक्तिमार्ग में। तो भक्तिमार्ग में जब युगल ने अच्छा काम किया होगा, तो दाढ़ी-मूँछ वाला बनी होंगी कि नहीं? (माता जी ने कहा - हाँ जी) उन्होंने उनका साथ नहीं दिया होगा। तो हिसाब-किताब पूरा नहीं करेंगे वो? करेंगे। (माता जी ने पूछा - हमने भी ऐसा किया है बाबा उनके साथ?) माना आपके आधे जन्म पुरुष चोले के नहीं होते हैं? होते हैं। तो जब आप दाढ़ी-मूँछ वाले......, आपने भी अत्याचार किए होंगे।
समय : 20.05-21.05
ड्रामा के आधार पर ही ठहरते हैं तो दुख नहीं होता है। अफसोस नहीं होता है क्योंकि ड्रामा को सामने रखते हैं। समझते  हैं बाप को बंदर से देवता बनाने की मेहनत है। घड़ी -2 भूल जाते हैं। रूहानी सर्विस बिगर वेस्ट आफ टाइम, वेस्ट आफ एनर्जी। देह अभिमान बड़ा भारी दुश्मन है। कडे़-ते-कड़ा मन है। अभी है दुश्मन। भल कहा जाता है काम महाशत्रु; परन्तु पहला शत्रु है दुश्मन क्योंकि देहअभिमान से ही सारे विकार आता है। अगर अपन को आत्मा समझे तो कोई विकार आएगा ही नहीं। इस देहअभिमान के कारण टाइम बहुत बर्बाद होता है।
Vcd- 209

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