एक-2 से पूछा जाए कि तुम कौन हो? तो कोई बताएगा हम किसान हैं, कोई बताएगा हम बूढ़े हैं, कोई बताएगा हम आदमी हैं, कोई बताएगा हम औरत हैं, कोई बताएगा हम बच्चा हैं, कोई कहेगा हम डॉक्टर हैं, कोई कहेगा मास्टर हैं; लेकिन उनसे पूछा जाए कि तुम हमेशा यही हो जो तुमने बताया? जब पैदा हुए थे तब डॉक्टर और मास्टर थे क्या? नहीं थे। आखिर क्या हैं वह कोई नहीं जानता। सब अपनी देह के बारे में बताएँगे, देह का ऑक्युपेशन बताएँगे, देह की उम्र के हिसाब से बताएँगे, स्त्री या पुरुष के हिसाब से बताएँगे। ये कोई नहीं जानता कि हम सदाकाल में क्या हैं। यह बात इस सृष्टि का मालिक, एक ही
परमपिता-परमात्मा आकर के बताते हैं। कहते हैं कि तुम सब बिंदु-2 आत्माएँ हो। इसलिए भारतवर्ष में माथे पर बिंदी लगाते हैं। तुम आत्मा हो, आत्मिक स्थिति में टिकी रहने वाली हो तो टीका लगाते हो। तुम देह नहीं हो। बूढ़ा कहेगा मैं बूढ़ा हूँ। वह बूढ़ा तो अब हुआ, पहले तो जवान था, उससे पहले तो बच्चा था ना। तो तुम बदलने वाले तो नहीं हो। बच्चा था तब भी आत्मा था, बूढ़ा हुआ तब भी आत्मा है, पैदा हुआ था तब भी आत्मा है और सदा ही आत्मा है। आत्मा ये शरीर छोड़ देगी तो भी आत्मा रहेगी। किसी माता के गर्भ से जाकर जन्म लेगी। तो आत्मा सदाकाल है। आत्मा कभी मरती नहीं है। आत्मा अजर, अमर, अविनाशी है। हाँ, आत्मा जन्म-मरण के चक्र में आती है और हरेक आत्मा में अपना-2 पार्ट भरा हुआ है। जन्म-जन्मान्तर जो पार्ट बजाया है, वो आत्मा के अन्दर भरा हुआ है। इतनी छोटी-सी आत्मा स्टार मिसल, बिंदी मिसल वह ऐसा वण्डरफुल रिकॉर्ड है, जिसमें जन्म-जन्मान्तर का पार्ट भरा हुआ है। आत्मा कभी स्त्री चोला लेकर के पार्ट बजाती है, कभी पुरुष चोला लेकर के पार्ट बजाती है। ये पार्ट सदैव चलता ही रहता है।
Vcd- 1387
वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 322
स्टूडेन्ट - बाबा, नवरात्रि में जगदम्बा को डुबाते हैं।
बाबा - हाँ, नवरात्रि में पूजा करके देवियों को डुबाते हैं। यहाँ जब एडवांस में आते हैं तो एडवांस में आने से पहले बेसिक नाॅलेज में जिनको देवियाँ समझते थे उनके ऊपर बहुत धन अर्पण करते हैं। मकान देते हैं, कपड़े देते हैं, खाने-पीने की वस्तुएँ देते हैं। अपने बच्चों को भले न दें ; लेकिन उनको अर्पण करते हैं। फिर जब एडवांस में आ जाते हैं तो जो डुबीजा-डुबीजा कर देते हैं। तो ये भक्तों की बातें हैं। जैसा बेसिक में हुआ है ऐसा आगे चलकर एडवांस में भी हो सकता हैे; क्योंकि जब एक बाप सच्चा प्रत्यक्ष होता है तो चाहे गणेश हो, चाहे हनुमान हो, चाहे देवियाँ हो उन सबकी देहधारियों की पोल पदरी हो जाती है। पोल पट्टी सब की खुल जाती है। सब में कमजोरियाँ समाई हुई हैं। एक बाप ही सच्चा है और बाकी सब? सब देहधारी मनुष्य झूठे साबित हो जाते हैं।
समय- 21.25
मैं बहुत रास्ता बताता हूँ और मोस्ट इजी, क्या करो? अभी ये जो देह जो धारण की है ना इस दुनिया में आकर, क्या करो अब? देह को भूल जाओ। अपन को आत्मा समझो और इतना ही नहीं आत्मा समझ करके आत्मा के बाप को पहचानो। कैसे पहचानेंगे? पहचान दिए कि आत्मा ज्योतिबिन्दु है, भृकुटि के मध्य में है। तो आत्मा के बाप को पहचान लेंगे? नहीं। कैसे पहचानेंगे? मुकर्रर रथ को पहचानेंगे; क्योंकि बाप आते हैं तो जिस तन में भी प्रवेश करते हैं- उसका नाम ब्रह्मा रखते हैं; क्योंकि बाप है ना! बाप को क्या चाहिए? बाप को बाप ही चाहिए सृष्टि रचने के लिए? माँ चाहिए। तो जिसमें भी प्रवेश करते हैं, नाम रखते हैं ब्रह्मा तो पहले-2 जिसमें प्रवेश करते हैं। तो एक में प्रवेश करते हैं या दो में करते हैं? एक में? अच्छा! जिस एक में प्रवेश करेंगे वो कैसे जानेगा? जानेगा? तो वो भी नहीं जानेगा, मैं तो बिन्दी हूँ। ज़रूर दो चाहिए ना!
Vcd- 2899
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