वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 303
स्टूडेन्ट - बाबा, मनसा सेवा सबसे श्रेष्ठ सेवा है। मंसा सेवा नहीं होती है तो कोई धन से सेवा करते हैं। तो धन सेवा माना बेहद में धन से सेवा क्या है?
बाबा - सीधी सी बात है। बेहद का धन जो ज्ञान में लगायेगा तो बेहद का धन स्थूल धन भी बना देता है। क्या? जो यहां ज्ञानी होगा वो ज्ञानी का सारा पैसा चोर लूट ले जाए, स्थूल धन। वो जहां भी जायेगा उसके आगे - पीछे वो पैसा घूमता रहेगा। तो जो ज्ञान धन है वो स्थूल धन में कनवर्ट हो जाता हैं। क्या? अब जहाँ कहीं भी धन लगाएँगे चाहे वो ज्ञान धन हो, चाहे वो स्थूल धन हो जहाँ कहीं भी हम अपने मेहनत का धन अर्पण करेंगे मन वही चला जाता है। तन की ताकत हम जहाँ कही भी लगाएँगे मन हमारा वहाँ ही जाएगा।
समय-19.55
तुम बच्चे अब जानते हो कि एक सद्गुरू की श्रीमत से है सद्गति और अनेक मनुष्य गुरूओं की मनमत और मनुष्य मत से है दुर्गति। श्रीमत से सद्गति और मनुष्य मत से दुर्गति। अब मैं यहाँ आया हुआ हूँ तो भी देखो श्रीमत पर नहीं चलते हैं 63 जन्म की रग पड़ी हुई है मनुष्यमत पर चलने की अथवा मनमत पर चलने की । तो मैं ऊँच-ते-ऊँच बाप जो बोलता हूँ, बताता हूँ उस बात को नहीं पकड़ पाते। बाप कहते हैं ये बनी बनाई बन रही, अब कछु बननी नाहिं। हर आत्मा ने पिछले 63 जन्म में जैसा-2 पार्ट बजाया है, वैसे-ही-वैसे वो मेरे आने के बाद भी शूटिंग करती है। वो संस्कार आत्मा में बंधे हुए हैं। कोई श्रेष्ठ मत पर चलते हैं, कोई फिर भी भ्रष्ट है, सड़ी हुई मत पकड़ लेते हैं। मैं तो आकर के पहली पहली बात बताता हूँ कि तुम आत्मा हो। दूसरों को भी आत्मिक रूप में देखोगे तो माया का अटैक नहीं होगा काम, क्रोध, लोभ, अंहकार ये वार नहीं कर सकेेंगे। इन बातों को तुम अभी जानते हा। सतयुग में ये नाॅलेज किसी को नहीं रहेगी। बाप ही संगम पर आए ये नाॅलेज देते हैं।
Vcd- 220
वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 303
स्टूडेन्ट - बाबा सृष्टि चक्र कैसे घूमाना है?
बाबा - पहले तो ब्रह्माकुमारियों वाला घूमाना सिख ले। सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग, संगमयुग......। अभी बताया जितना हम गुड़ डालेंगे उतना मीठा होगा। जितना हम अर्पणमय बनेंगे उतना हमारा मन रूपी दर्पण पावरफुल बनेगा। अगर हम तन और धन नहीं लगावेंगे ईश्वरीय सेवा में, तो हमारा मन उस तरफ नहीं जाएगा। मन को, बुद्धि को पावरफुल बनाने का यही रास्ता है कि हम ज्यादा से ज्यादा विश्व कल्याण के लिए अर्पण कर देवे।
समय 20.56
सारे विश्व का नाथ कौन बनता है ? हिटलर नहीं बनता। नेपोलियन नहीं बनता, मुसोलिनी नहीं बनता। हिस्ट्री में इनकी बातें आई हैं कि ऐसे -2 महत्वाकांक्षी दूसरे -2 धर्मों में हुए हैं। जिन्होंने इच्छा की हम सारे विश्व में राज्य करेंगे। लेकिन वो सारी दुनिया पर विश्व पर राज्य नहीं कर सके। बीच में ही मरबिल्लाए के चले गए। ये तो एक सुप्रीम सोल बाप ही जो आकर के ऐसी पढ़ाई पढ़ाए रहा है , ऐसा राजयोग सिखाए रहा है जिस राजयोग को सीखकर के सारी सृष्टि पर राजाई प्राप्त कराने का पुरूषार्थ कराया जा रहा है। अब जो जैसा पुरूषार्थ करे वैसा जन्म-जन्मान्तर का राजा बने। कोई ऐसे भी होंगे जो सम्राट बनेंगे। कोई ऐसे भी होंगे जो जन्म-जन्मान्तर राजाएँ बनेंगे। छोटे-बड़े राजाएँ बनेगे। कोई ऐसे होगे जो राजकुल में जन्म तो लेंगे लेकिन राजा नहीं बनेंगे राजकुमार-कुमारी बनकर के रह जाएँगे। तो ये प्राप्ति परमात्मा बाप आकर के कराए रहे हैं।
Vcd- 220
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