श्लोक 2/11:-
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः।। 2/11*
संधिविच्छेदः-
अशोच्यान् अन्वशोचः त्वम् प्रज्ञावादान् च भाषसे।
गतासून् अगतासून् च न अनुशोचन्ति पण्डिताः।।
शब्दार्थ:-
त्वं ( तू ) अशोच्यान् ( शोक न करने योग्य का ) अन्वशोचः ( शोक कर रहा है ) च ( तथा ) प्रज्ञावादान् ( ज्ञानियों जैसे वचन ) भाषसे ( बोलता है )। पण्डिताः ( पण्डितजन ) गतासून { अनिश्चय में } ( मरे हुए ) च ( और ) अगतासून ( जीने वालों का ) न अनुशोचन्ति ( शोक नहीं करते )।
अर्थ:-
तू शोक न करने योग्य का शोक कर रहा है तथा ज्ञानियों जैसे वचन बोलता है। पण्डितजन अनिश्चय में मरे हुए और जीने वालों का शोक नहीं करते।
सच्ची गीता खंड-1/बाप की पहचान ( नाम,रुप से )
खंड प्वाँईन्ट:-
जनक जो सीता का बाप था उसको जीवनमुक्ति एक सेकण्ड में मिली थी।.....कमल फूल समान पवित्र बनना है जनक मिसल। वो ही जनक फिर अनु जनक बना।
( 09.12.1983 पृ.1 आ.म. )
जिज्ञासु - जो 36 का जन्म था प्रजापिता वाली आत्मा का, राम वाली आत्मा का, वो चौरासीवां (84th) जन्म था और 42 टू 75 का जो जन्म था वो 84 जन्म के बाद और 76 जब वो लक्ष्मी नारायण बन गया तो पहला जन्म गिना जाता है, ये तो ठीक है न?
बाबा - हम्म।
जिज्ञासु - तो इसी तरह से, जो भी 4.5 लाख आत्मायें हैं जो इसी शरीर से कंचन काया बनते हैं तो उन सबका ऐसे ही 84 जन्म के बाद वाला जन्म होता है क्या?
बाबा - कम्बाइंड होता है माना। एक ही शरीर में दोनों जन्म कम्बाइंड हैं। लास्ट जन्म भी उसी में है और फर्स्ट जन्म भी उसी में, उसी शरीर के द्वारा।
जिज्ञासु - तो यहाँ जो भी इस शरीर से कंचन काया हो रहे हैं, जो भी आत्मायें, तो अभी उनका जन्म कहा जाता है 84 जन्म के बाद वाला जन्म?
बाबा - जब कंचन काया बन जाये तभी तो कहा जायेगा। एक्यूरेट तो तभी कहा जायेगा जब कंचन काया बन जाये। पहला जन्म भले हम बौद्धिक आधार पर कह दें, मन-बुद्धि की रिफार्मेशन हुआ। लेकिन सम्पूर्ण रिफार्मेशन थोड़ेई हुआ। वो तो तभी कहा जायेगा जब शरीर पाँच तत्व भी परिवर्तित हो जायें, तब पूरा परिवर्तन हुआ।
जिज्ञासु - तो पहला जन्म कब से गिना जायेगा?
बाबा - पहला जन्म, एक मन-बुद्धि के आधार पर तो, जैसे प्रजापिता का सन 76 से गिना गया। ऐसे ही जगदम्बा का जब, जगदम्बा को अपने ऊपर निश्चय पैदा हो जाये (किसी ने कुछ कहा) जब निश्चय पैदा हो जाये। निश्चय पैदा हो जाये वो तो एक्टिविटी से भी पता चलेगा न? तो वो प्रत्यक्षता का टाइम आँका जायेगा।
जिज्ञासु - तो बाद वाली आत्माओं का भी ऐसे ही है नम्बरवार?
बाबा - ऐसे ही है।
जिज्ञासु - तो अभी जो वर्तमान जन्म चल रहा है संगमयुग में इसको क्या कहा जायेगा? माना किस नम्बर का जन्म कहा जायेगा?
बाबा - बौद्धिक आधार पर पहला जन्म कहेंगे, जिनकी प्रत्यक्षता होने लगे या जिनको अपने पार्ट पे निश्चय हो जाये।
जिज्ञासु - अभी जिनको नहीं हुआ है?
बाबा - जिनको नहीं हुआ है उनके 84 जन्म। चौरासीवाँ जन्म। चौरासीवाँ जन्म हुआ, लास्ट जन्म हुआ। फर्स्ट जन्म थोड़ेई कहेंगे। बौद्धिक आधार पर भी पहला जन्म नहीं कहेंगे। उनका लास्ट जन्म ही चल रहा है।
जिज्ञासु - तो अभी जो जन्म चल रहा है संगमयुग में पुरुषार्थ वाली, तो इसको 84वाँ जन्म कहेंगे या 84वाँ जन्म के बाद वाला जन्म कहेंगे?
बाबा - बता तो दिया, अगर निश्चय पैदा हो गया, मैं कौन, मैं आत्मा कौन, मेरा पार्ट कौन, मेरा मणका कौनसा? किस माला में कौनसे मणका है, कौन से नम्बर का, ये फिक्स हो गया बुद्धि में तो उसका पहला जन्म, बौद्धिक आधार पर। शारीरिक आधार पर नहीं, बौद्धिक आधार पर। अगर फिक्स नहीं हुआ, निश्चय पूरा पैदा नहीं हुआ या हिलता डुलता है (तो) ऑडियो कैसेट - 372
सवेरे उठते नहीं हैं। जिन सोया तिन खोया। तुम जानते हो बरोबर हमको हीरे जैसा जन्म मिला है। अब भी अगर नींद से सवेरे नहीं उठेंगे तो समझेंगे यह बख़्तावर नहीं हंै। सुबह को उठकर मोस्ट बिलवेड बाप को, साजन को याद नहीं करते हैं। आधा कल्प से साजन बिछुड़ा हुआ है ; क्योंकि साजन और सजनी की बात भक्तिमार्ग से चलती है। बाप को तो तुम सारा कल्प भूल जाते हो फिर भक्तिमार्ग में तुम साजन के रूप में वा बाप के रूप मेें याद करते हो। (मु.9.10.83 पृ.1 अं.)
बाहर का कुछ भी शो आदि करना यह तो दुनियावी बातें हैं। अपना ज्ञान ही है गुप्त। (मु 20. 2.74 पृ. 4 मध्यादि) (शिवबाबा भी गुप्त) गीता में भी कहा है योग माया से ढका हुआ मैं सबके लिए प्रकट नहीं हूं। यह मूढ़ जगत मुझ अजन्मा, अविनाशी पार्टधारी को नहीं जान पाता। (अध्याय 7/25).
Vcd 3378 प्रात: क्लास16.041968
व्याख्या 20.09.2020 दि.05.10.2020
मुरली पॉइंट :- प्रश्नचिन्ह बनते हो तो अनिश्चय बुद्धि बनते हो क्योंकि पढ़ाई कम पड़ते हो तो प्रश्न ज्यादा उठते हैं पूरी पढ़ाई पढ़े जो जितना पड़ता है वह उतना उच्या पद जा कर पाते हैं ।
ओम शांति
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