वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 307
स्टूडेन्ट - साकार में धर्मराज का पार्ट बजाने वाली आत्मा ईश्वरीय संविधान में किस श्रेष्ठ...में पारंगत होनी चाहिए? वो श्रेष्ठ वकील कौन हैं और कितने हैं ?
बाबा - यहाँ संविधान कौन-सा है? ब्राह्मणों की दुनियाँ का संविधान कौन-सा है? ब्राह्मणों की दुनियाँ का संविधान है - ”मुरली“, और मुरली के महावाक्यों में जो जितना पारंगत होगा, वो उतना ही बड़ा वकील है। पहले तो अपने को छुटकारा दिलावे।
हम सब जेल में पड़े हुए हैं। रावण की जेल है, कंस की जेल है। उस कंस की जेल में पहले खुद का छुटकारा हो। साथ-साथ दूसरों का भी छुटकारा करने वाला बने। वकील लोग होते हैं , उनका धंधा ही क्या होता है? फँसे हुए को छुड़ाना। वो तो हद के वकील
हैं। हद की कमाई करते हैं और यहाँ तो बेहद की कमाई है अनेक जन्मों की। जितना-जितना अपने को छुड़ाते जावेंगे, औरों को भी छुड़ाने में समर्थ बनते जावेंगे। उसके लिए चाहिए ईश्वरीय ज्ञान की पराकाष्ठा। जो ज्ञान में जितना तीखा होगा, उतना
बड़ा वकील बनेगा। धर्मराज बाप का सहयोगी बनेगा।
समय- 3.52
दु;ख का मूल कारण क्या हुआ? स्व की विस्मृति होती गई और जो देह है, जो अपनी चीज़ नहीं है, आज हमें देह दिखाई पड़ रही है और कल ये देह खलास हो जाएगी, तो देह, देह के पदार्थ, देह के संबंध वो याद आने लगे। तो जो असली स्मृति है उससे हम विस्मृत हो गए। असली स्मृति क्या है? आत्मा की याद। वो आत्मा की याद से हम महरूम होते गए, होते गए, होते गए, आज सारी दुनियाँ भौतिक बन गई। सब मनुष्य मात्र किसके पीछे पड़े हुए हैं? भूत। पाँच तत्वों से बने हुए पदार्थों के पीछे पड़े हुए हैं। बुद्धि 24 घण्टे कहाँ लगी रहती है? देह के संबंधों में लगी रहती है। देह की परवरिश में लगी रहती है। देह के पदार्थों को इकट्ठा करने में लगी रहती है। तो इन चीज़ों की याद का ये जो लगाव पैदा हो जाता है, यही फिर हमको जन्म-मरण के चक्र में लाता है और ऐसे चक्र में लाता है जिससे हमको दुःख मिलता है, सुख नहीं मिलता है। अभी भौतिकवाद बरहा है कि कम हो रहा है? भौतिकवाद मतलब भौतिक चीजें़। पाँच तत्वों से बनी हुई वस्तुएँ हमको इतना आकर्षित करती जा रहीं हैं और आत्मा की विस्मृति होती जा रही है। तो परमात्मा बाप आकर के मुख्य बात यही सिखाता है कि अपने को आत्मा समझो। दूसरे को भी देखो तो आत्मिक रूप में भृकुटि के मध्य में चमकता हुआ सितारा देखने की प्रैक्टिस करो। प्रैक्टिस पक्की हो जाएगी तो वो सितारा ही याद पड़ेगा। फिर ये देह याद नहीं पड़ेगी। देह जब याद नहीं पड़ेगी तो देह का आकर्षण भी आकर्षित नहीं करेगा। जब देह का आकर्षण नहीं होगा, आत्मा की ही स्मृति रहेगी तो उसका रिज़ल्ट ये होगा कि हम स्वस्थिति में रहने के कारण स्वर्ग का अनुभव करेंगे। इस दुनियाँ में भी स्वर्ग का अनुभव कर सकती हैं आत्माएँ। अगर अनुभव नहीं कर सकतीं तो मुसलमानों की कुरान में ऐसे (क्यों) लिखा हुआ है कि जब दुनियाँ का विनाश होगा/कयामत होगी तो भगवान के बंदे बड़े मौज में रहेंगे? दुनियाँ का विनाश होना है तो दुनियाँ दुखी होनी चाहिए। भगवान के बंदे क्यों मौज में रहेंगे? कोई कारण होगा? हाँ, भगवान ने उनको पहले से ही गुप्त रूप में ये पाठ पढाया कि तुम ये पढाई पढो। क्या पढाई पढो ? कि तुम देह नहीं हो, तुम ज्योतिबिन्दु आत्मा हो।
Vcd- 783
वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 315
स्टूडेन्ट- बाबा, गीता पाठशाला खोलने के लिए कौन सी फाॅरमैलिटी पूरी होनी चाहिए?
बाबा - एक तो भट्ठी किया हुआ हो। जो मुरली में बोला है महत्व भट्ठी का, सात दिन की एडवान्स कोर्स की भट्ठी हो और दूसरा हिन्दी जानने वाला हो और तीसरी बात है कि ब्राह्मण बना है तो प्रवृत्तिमार्ग का धर्म स्थापन हो रहा है। तो प्रवृत्तिमार्ग वाला हो। कम-से -कम ऐसा अन्दर से यह भाव रहे कि हम गीता पाठशाला खोलके बैठे हैं तो आने वाले स्टुडेन्ट कहीं ये न जाने की इनकी दो मतें हैं। गीता पाठशाला में निमित्त टीचर तो माता हेागी। तो जिसको निमित्त टीचर बनाया जाएगा उस टीचर की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। कोई बात में अगर क्राॅस होता भी है तो बाबा के सामने रखकर उसका सोल्युशन लेवें। ये तीन बातें है। कोई भी गीता पाठशाला खोल सकता है इसके लिए ये भी जरूरी नहीं है कि बड़ा मकान हो। कोई के पास एक कमरा है तो मुरली में बोला है - उसमें सफाई करके क्लास चलाओ, उसी में खाना बनाओ और उसी में सफाई करके फिर रात में सो जाओ।
समय-10.29
जो मीठे-ते-मीठे बाप है; सबसे मीठा बाप सुप्रीम सोल हैविनली गाॅड फादर वो ही हम आत्माओं को आकर के समझाते हैं कि बच्चों अब भले तुमने अपने-2 84 जन्मों के पार्ट की बीच कोई भी बाप को याद किया हुआ हो, क्रिश्चियन्स के रूप में कनवर्ट हुए या नहीं कनवर्ट हुए, पक्के क्रिश्चियन हुए या बौद्धी हुए या इस्लामी हुए तो तुमने अपने धर्मपिता को याद किया। कनवर्ट होने वालों ने भी याद किया और जो कनवर्ट नहीं होते हैं उन्होंने भी याद किया ना ? नहीं समझ में आ रहा है ! हा। तो भले तुमने अपने 84 के चक्कर में उन बापों को याद किया लेकिन अब ? अब मुझे याद करो। तो क्या होगा ? कि तुम्हारे मेें जो भी ये दूसरे-2 धर्म के धर्मपिताएँ आए अधूरे -2 उनहें आकर के जो तुम्हारे अन्दर खोट डाल दी ना, विकारों की खाद डाल दी ना। वो विकारों की खाद कहो, जंक कहो, वो जो लगी हुई है वो खाद सारी निकल जाएगी। खत्म हो जाएगी और फिर तुम बच्चे फिर सतोप्रधान बन जावेंगे।
Vcd- 3306
वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 322
स्टूडेन्ट- बाबा, त्रिमूर्ति में बी.के. वाले बताते हैं कि शंकर का पार्ट कुछ भी नहीं है वो सिर्फ विनाश करता है। ऐसे क्यों?
बाबा - क्योंकि उनके धर्म का विनाश होता है। उन्होंने जो प्रजा रची है जो इतनी अभी तक मेहनत की है वो सब खलास होने वाली है। तो अपना विनाश कौन चाहेगा? जैसे बिल्ली है,कबूतर है। कबूतर के सामने जब बिल्ली आती है तो कबूतर अपनी आँखे बंद कर लेता है। बिल्ली आई नहीं। ऐसे ही ब्रह्माकुमारियाँ कहती है शंकर होता ही नहीं। जबकि सारी दुनिया शंकर को और विष्णु को मानती है। सारी दुनियाँ में शंकर और विष्णु की भगवान के रूप में मान्यता है। मंदिर बने हुए हैं, मूर्तियाँ बनी हुई हैं तो मानना ही पडे़गा। और वो क्या कहते हैं - शंकर और विष्णु प्रैक्टिकल में होता ही नहीं। उनको कहने दो।
समय - 17.48
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