अक्षरं परमं ब्रह्म (गीता 8/03) कौन है??
★ 84 जन्म लेने वाली जो क्षरित आत्मा है, उनमे भी नंबर वार है। कोई तो ऐसी है- जो 100% अक्षर है। उसका पार्ट इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर कभी खत्म होता ही नही। उसको बोला है गीता में-अक्षरं परमं ब्रह्म। वो परमब्रह्म है। 2 प्रकार की केटेगरी बताई। क्षर और अक्षर। जो क्षर है-वह 500-700 करोड़ मनुष्यात्माए है, अक्षर एक शिव है। परंतु जो क्षर आत्मा है उनमें भी एक आत्मा ऐसी है जो अक्षर है पार्ट के आधार पर। उसका पार्ट कभी खत्म नही होता। इसलिए बताया-शिव अक्षर, 500-700 करोड़ मनुष्यात्माएं क्षरित होने वाली, परंतु उन क्षरित होने वाली आत्माओं में भी एक आत्मा ऐसी है जो विष्णु पद पाती है। परमपद जिसें कहा जाता है। सारी मनुष्य सृष्टि का बीज। उत्तम पार्टधारी। पुरुषोत्तम। पुरुषो में उत्तम पार्टधारी। शिव को पुरुषोत्तम नही कहेंगे। उसकी कैटोगरी नही है। उसको किसी केटेगरी में रखा नही जा सकता। वो गिनती से बाहर है। इसलिए नाम जीरो है। गिनती में आने वाले 9 अंक है। जीरो को अकेला जीरो रख दो कोई वैल्यू नही। कोई भी अंग के साथ जीरो रखो तो वैल्यू है। Varta 1682 [@ 37mins]
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