स्टूडेंट - बाबा कहते हैं एक राधा को छोड़कर सभी कन्याए- माताएं सीताए हैं?.. बाबा कहते हैं सब सीताए हैं, सब पार्वतीयां हैं, सिर्फ राधा को छोड़कर?
बाबा- हां ।माने राधा का जितना प्रेम शुद्ध है, इतना शुद्ध प्रेम कोई का नहीं है, जितना राधा श्रीमत पर चलती है। प्रेम जिससे होगा, उसकी बात मानी जाएगी या नहीं। प्रेम नहीं होगा तो बात भी नहीं मानेंगे। बरोबर अवज्ञा करेंगे। छोटी बात हो, बड़ी बात हो अवज्ञाकारी बनेंगे, नाफरमान बनेंगे, क्योंकि बाप के प्रति प्यार नहीं है। बाप को पहचानना ही नहीं है, तो सीता ने क्या किया? हैं, सीता ने लीका तोडी ना। श्रीमत की लीका को राधा ने तोड़ा या सीता ने तोड़ा? सीता ने तोड़ा। तो एक के अलावा तुम सब सीताएं हो। यह नहीं कहते कि तुम सब राधायें हो। राधा एक ही होती है। रा अर्थात राम, धा माना धारण करने वाली। सौ परसेंट राम को धारण कर लेती है। अर्थात श्रीमत् को धारण कर लेती है।। वार्ता 1007 @00.13
[10:34 AM, 10/6/2020] +91 88797 26711: वेदों की ऋचाओं में भी लिख दिया है; क्योंकि जिस समय वेद बनाए गए थे उस समय मनुष्यों की बुद्धि सात्विक थी। उसमें भी लिखा हुआ है कि हे परमपिता! हम पहले तुम्हें सर्वव्यापी नहीं मानते थे ;अब सर्वव्यापी मानते हैं। गीता में भी लिखा हुआ है- मैं सूरज, चांद, सितारों की दुनिया से परे परलोक का रहने वाला हूं। तो भी सर्वव्यापी कह दिया। अरे, शास्त्र तो अनेक मनुष्य गुरुओं के द्वारा लिखे हुए हैं। "तुंडे-2 मतिर्भिन्ना", एक ही बात न मिले दूसरे से। एक ही गीता की सैकड़ों टिकायें कर दी, सैंकड़ों व्याख्यायें कर दी। एक व्याख्या न मिले दूसरी व्याख्या से। माधवाचार्य की गीता कहती है- आत्माएं अनेक हैं। शंकराचार्य की गीता कहती है- एकौ ब्रह्म द्वितीयो नास्ति, आत्माएं अनेक नहीं है; एक ही ब्रह्म है वही अनेक रुपों में भासता है। जैसे पानी के बुदबुदे हैं सागर में, वे सागर में मिल जाते हैं। एक ही सागर है। अब क्या सच्चा, क्या झूठा - कौन बताएगा? भगवान ही आकर बताता हैं- बच्चे, मैं सर्वव्यापी नहीं हूं। जब सृष्टि का अंतकाल होता है तो मैं आकर अपना परिचय देता हूं। वीसीडी 582
[10:34 AM, 10/6/2020] +91 88797 26711: 'शिव' नाम इसलिए है कि सारे संसार का कल्याण करता है। एक भी मनुष्य मात्र आत्मा ऐसी नहीं रहती जो यह स्वीकार न करे कि उसने हमारा कल्याण नहीं किया। सब एहसास करते जाते हैं, अनुभव करके जाते हैं- इस दुनिया में जितना गॉडफादर हमारा कल्याणकारी है, परमपिता जितना कल्याणकारी है, उतना कल्याण और कोई नहीं कर सकता। कल्याण कैसे करते हैं? निराकार रूप में करते हैं या साकार बनकर कल्याण करते हैं? निराकार तो इन आंखों से देखने (में)ही नहीं आता है। पंडित- आचार्यों ने कह दिया है- बिनु पग चले, सुने बिनु काना ।बिना पांव के चलता है, बिना कान के सुनता है, बिना आंख के देखता है; लेकिन उनसे कहा जाए, कैसे? तो बता नहीं सकते ;लेकिन शास्त्रों में ही, दूसरे मनुष्य गुरुओं ने जो गीता लिखी है, उन्होंने लिख दिया है- 'प्रवेष्टुं' (गीता 11/54)मैं प्रवेश करने योग्य हूं ।गीता में ही भगवान के महावाक्य हैं।*वीसीडी 582
[10:34 AM, 10/6/2020] +91 88797 26711: शिव का रूप लिंग के रूप में दिखाया जाता है। मंदिर में जाएंगे तो शिवलिंग की पूजा करेंगे। ऐसे थोड़े ही कहा जाता है, शंकरलिंग। क्या कहा जाता है? शिवलिंग। क्योंकि वह सदैव बिंदु रूप में रहने वाला है।... वह कभी देह धारण नहीं करता है। शंकर को तो अपनी देह होती है। पुराने-2 मंदिर में चले जाओ, बीच में शिवलिंग होगा और आस-पास सभी देवताओं की मूर्तियां रखी होंगी, उन मूर्तियों के बीच में शंकर का चित्र रखा होगा, मूर्ति रखी होगी। इससे साबित होता है कि चारों ओर बच्चे बैठे हैं और बीच में उन आत्माओं का बाप शिव ज्योतिबिंदु शिवलिंग रखा हुआ है। वह हम सबका बाप है। हम सब को आकर के अपना परिचय देता है। बताता है कि बच्चे, मैं तुम्हारा बेहद का बाप हूं।वीसीडी 1387
[10:34 AM, 10/6/2020] +91 88797 26711: द्वापर युग के राजाओं का गायन है कि उन्होंने संगम में रह करके तप कर राज पाया, आत्मिक स्थिति की तपस्या करके राज्य पाया। तप कर राज और राज कर नर का। जब राजा बनते हैं द्वापर में, तो नरक में जरूर जाते हैं। क्यों भाई! नर्क में क्यों जाते? स्वर्ग में क्यों नहीं जा सकते? क्योंकि द्वापर युग से जो भी इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट आदि धर्म पिताएं आते हैं वो नर हैं या स्वस्थिति में रहने वाले सदाशिव हैं? नर है। तो नर क्या करेगा? नर नरक बनाता है; सदा स्वस्थिती में रहने वाला जो भगवान है वो स्वर्ग बनाता है। तो जो चैतन्य भारत है, वह द्वापर युग से नर रूप बन जाता है। वीसीडी 2309
No comments:
Post a Comment