वार्तालाप प्वाइंट वार्ता न. 306
स्टूडेन्ट- मुरली में बोला है मैं हर कल्प के संगम में आता हूँ, फिर बोला मैं युगे- युगे नहीं आता हूँ, फिर बोला है कल्प कल्प कल्प के संगम में मैं आता हूँ। ये कल्प कल्प कल्प का अर्थ क्या हैं?
बाबा:- मैं कल्प कल्प कल्प के संगम में आता हूँ। तो तीन बार कल्प रिपीट किया है। जब 76 तक देवता वर्ण की शूटिंग होती है, तो देवता वर्ण की शूटिंग में चार अवस्थाएँ होती हैं। सतोप्रधान, सतोसमान्य, रजो और तमो। ये चार युग हो गए। एक कल्प हो गया। ऐसे ही त्रेतायुगी क्षत्रिय वर्ण की आत्माओं की शूटिंग। उसमें भी चार अवस्थाएँ, चार युग हो गए। एक कल्प हो गया। ऐसे ही द्वापरयुगी वैश्य वर्ण की आत्माओं की शूटिंग। कहते हैं ब्रह्मा ने तीन बार सृष्टि रची और तीनों बार बिगाड़ दी। तीन बार जो कल्प बोला है वो शूटिंग पीरियड के लिए बोला है।
समय - 3 मि. 47 से.
यह आत्मा कितनी जबरदस्त कुदरत है। इसकी हिस्ट्री भगवान बाप आकर बताता है। अपनी आत्मा के 84 के चक्र कोजानने के लिए और परमात्मा बाप की बायोग्राफी को जानने के लिए, इस एक संगमयुग के जन्म में ही मनुष्य मात्र को मौका मिलना है, मिलता है और मिल रहा है। इसके अलावा और कोई जन्म नहीं होगा, जहाँ मनुष्यात्माएँ अनेक जन्मों की राजाई प्राप्त कर सके। यह जन्म-जन्मान्तर की राजाई भगवान आकरके देते हैं; लेकिन जो पढ़ेंगे वे प्राप्त करेंगे। मनुष्य पढ़ाई पढ़ाते हैं तो एक जन्म के लिए डॉक्टर बनावेंगे, इंजीनियर बनावेंगे, वकील बनावेंगे, जज बनावेंगे और वह भी कोई ज़रूरी नहीं कि पढ़ाई पढ़ने के बाद डॉक्टर, जज या इंजीनियर बन ही जावे और भगवान बाप तो गारण्टी देते हैं कि मैं जो पढ़ाई आकरके पढ़ाता हूँ, अगर तुम रेगुलर पढ़ेंगे तो गारण्टी से राज परिवार के मणके बनेंगे, राज परिवार भाँती बन जावेंगे, जो जन्म-जन्मान्तर का राज परिवार भगवान आकरके बनाता है। यह राज परिवार
16,108 आत्माओं का राज परिवार है। पढ़ने वाले लाखों की तादाद में होंगे। सारी दुनियाँ भगवान की यह पढ़ाई पढ़ेगी; लेकिन नम्बरवार ऊँच पद पाने वाले सिर्फ 16,108 बनेंगे, जो जन्म-जन्मान्तर राज घराने में जन्म लेते रहेंगे, प्रिन्स-प्रिन्सेज बनते रहेंगे, राजाई प्राप्त करते रहेंगे, राजा-रानी, महाराजा-महारानी बनते
रहेंगे। अच्छी पढ़ाई पढ़ेंगे तो अच्छा पद पावेंगे, भगवान की पढ़ाई पढ़ते-2 शैतान के चक्कर में आते रहेंगे तो कोई-2 जन्म में दास-दासी भी बन सकते हैं, चाण्डाल भी बन सकते हैं। राज परिवार के चाण्डाल अलग होते हैं, दास-दासी अलग होते हैं और प्रजा घराने में साहुकारों के दास-दासी अलग होते हैं, उनके चाण्डाल भी अलग होते हैं। यह सारा हिसाब-किताब जन्म-जन्मान्तर का अभी तैयार हो रहा है। भगवान इस सृष्टि पर बार-2 नहीं आता।
Vcd- 642
No comments:
Post a Comment