Thursday, October 1, 2020

प्रर्दशनी आदि में जब कोई आते हैं , पहले पहले ऊँच-ते-ऊँच बाप की महिमा जरूर बतानी है। वो सुप्रीम या परम बाप है। उससे  ऊँचा और कोई बाप नहीं होता है। बच्चे भूल जाते हैं। उस समय  समझाते समय याद नहीं पड़ता हैं कि बाप की महिमा कैसे सुनावे ? पहले तो ये समझाना कि वो सुप्रीम बाप भी है , टीचर भी है और गुरू भी है। एक ही है। जो बाप के रूप में भी पार्ट बजाता  है। ज्ञान का बीजारोपण करता है अंत में वर्सा देता है। बीच में टीचर भी है और अंत में गुरू का पार्ट भी बजाता है। उन तीनों को याद करना पडे़। बाप को याद करेंगे तो बाप के संबंध से सुख शांति का वर्सा मिलेगा। टीचर को याद करेंगे  तो एक एक बात की गहराई मिलेगी। और गुरू को याद करेंगे  तो सद्गति मिलेगी। याद  तो शिवबाबा को ही करना है। और तीनों रूपों में याद करना है , ये तो पक्का करना पड़े।
VCD- 777
वार्तालाप प्वाइंट          वार्ता न. 302

स्टूडेन्ट- बाबा, शिव बाबा को ज्ञानी तू बच्चे प्यारे हैं। बाबा ने बोला है अनपढ़ माता भी आगे जा सकती है। तो बांधेली माता तो ज्ञान नहीं सुनती है तो वो भी108 की माला में आ सकती है क्या?

बाबा - जो याद में तीखा होगा वो अंत में ज्ञान में भी तीखा हो जावेगा। धारणा में भी तीखा हो जावेगा। एक याद के बल से सारी शक्तियाँ आ जाती हैं। (अनपढ़ माता भी) भले अनपढ़ माता हो तो भी उसमें ज्ञान की पावर, धारणा की पावर और वाईब्रेशन से सेवा करने की पावर सबसे तीखी हो जावेगी। 

स्टूडेन्ट- लेकिन उनमें ज्ञान नहीं है और ज्ञानी तू बच्चे बाबा को प्रिय है।

 बाबा - ज्ञान नहीं है ; लेकिन बाप के प्रति प्यार तो होता है, लगाव तो होता है, लगन तो होती है। योग बल से जब विश्व की बादशाही मिल सकती है तो धारणा, सेवा और ज्ञान नहीं मिल सकता?
समय: 56.06

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